इन आसान तकनीकों से करे मशरूम की खेती होगी पैसो की बारिश, जानिए मशरूम की खेती की पूरी प्रोसेस

देश में मशरूम की लगातार मांग बढ़ रही है, मशरूम की मांग बढ़ने से किसान इसकी खेती की तरफ आकर्षिक हो रहे है अगर बढ़ती मांग के चलते मशरूम की खेती करना फायदे का सौदा होगा। किसान भाइयो अगर आप भी ऐसी खेती करना चाहते हो जिससे बम्फर मुनाफा कमाया जा सकते तो आज हम आपको इस आर्टिकल में मशरूम की खेती के ऐसे तरीके के बारे में बतायेगे जिससे आप बम्फर मुनाफा कमा सकते हो।

जानिए मशरूम की खास किस्मों के बारे में


भारत में मशरूम की पांच किस्मों को सबसे ज्यादा लगाया जाता है जिसमे सफेद बटन मशरूम, ढिंगरी मशरूम, पुआल मशरूम, दूधिया मशरूम और शिटाके मशरूम शामिल है।

जानिए मशरूम उगाने की सबसे सही तकनीकों के बारे में

हम आपको बता दे की भारत में मशरूम उगाने को इन तकनीकों को बेहतर माना जाता है जिनमे शैल्फ तकनीक और ट्रे तकनीक और पॉलीथीन बैग तकनीक शामिल है, आईये जाने इन तकनीकों के बारे में विस्तार पूर्वक।

1. शेल्फ तकनीक


पहले नंबर पर हम बात करेंगे शेल्फ तकनीक की इसमें मजबूत लकड़ी के एक से डेढ़ इंच मोटे तख्ते लेकर शैल्फ बनाया जाता है इनको लोहे की कोणों वाली फ्रेमों पर जोड़कर रखें. फट्टे अच्छी लकड़ी के होने जरूरी हैं ताकि वे खाद का बोझ सहन कर सकें. शैल्फ की चौड़ाई 3 फुट से ज्यादा न हो. दो शैल्फों के बीच कम से कम डेढ़ फुट का अंतर जरूरी है शैल्फों को एक दूसरे के ऊपर पांचवीं मंजिल तक ले जाया जा सकता है।

2. पॉलीथीन बैग तकनीक


दूसरे नंबर पर हम बात करेंगे पॉलीथीन बैग तकनीक की जिसमे 25 इंच लंबाई और 23 इंच चौड़ाई वाले 200 गेज माप के पॉलीथीन के लिफाफों की ऊंचाई 14 से 15 इंच और मशरूम पैदा करने का 15 से 16 इंच का व्यास रह जाता है, पॉलीथीन बैगों को कमरे में एक के ऊपर दूसरी शैल्फ बनानी जाती है इन बैगो को जमीन पर नहीं रखा जाता है बल्कि पॉलीथीन बैग को शैल्फ पर रखा जाता है ताकि उसी एरिया पर अधिक बैग रखे जा सकें।

3. ट्रे तकनीक


तीसरी नंबर पर हम बात करेंगे ट्रे तकनीक की इसमें लकड़ी के ट्रे या पेटी बनाई जाती है ताकि इसे आसानी से एक कमरे से दूसरे कमरे में और एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाया जा सके इसका साइज लगभग 1/2 वर्गमीटर होता है, जो कि 6 इंच गहरी होनी चाहिए इस साइज की पेटियों में 28 से 32 किग्रा खाद आसानी से आ जाती है, चैक बोर्ड तकनीक में कमरे में कम ट्रे लगाई जा सकती है, क्योंकि थोड़ी पेटियों के लिए कमरे की ज्यादा जगह की जरूरत पड़ेगी. आधा वर्गमीटर की 400 पेटियां एक कमरे में लगाई जा सकती है।

Digambar

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