अमेज(सी- बकथार्न) की कम लागत में खेती करने के बारे बता रहे है,जानिए इसकी पूरी डिटेल

उत्तराखंड में यह हनुमानचट्टी, नीती, माणा, भ्यूधार, वाड़, सुतोल, कनोल, रामबाड़ा, गंगोत्री, यमुनोत्री, मुंनस्यारी, धारचुला, बागेश्वर आदि स्थानों में प्राकृतिक रूप से बहुतायत मात्रा में पाया जाता है। अमेज को हिपोफी भी कहा जाता है। यह ’सुनहली झाड़ी’ और ’स्टोर हाउस ऑफ विटामिन्स’ के नाम से भी प्रसिद्ध हैं क्योंकि इसके फलों में विटामिन- सी, ए, बी, के तथा ई की प्रचुर मात्रा होती है ।और स्थानीय नाम अमील, अमेस, चूक तथा खट्टा आदि। उत्तराखण्ड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में 4000 से 14000 फुट की ऊंचाई पर उगने वाले इस पवित्र पौधे अमेज के फलों के चमत्कारिक गुणों के कारण यह 'संजीवनी बूटी' के तुल्य माना जाता है।

जानिए सी-बकथोर्न :-

यह फल उत्तर-पश्चिमी हिमालय की शुष्क श्रृंखलाओं में नदी किनारे मिलते हैं।और यूरोप एवं एशिया के मूल निवासी हिप्पोफी की चाइना सहित 30 से अधिक देशों में उपस्थिति दर्ज की गई है।यह हिमालय के शीत मरूस्थल क्षेत्रों में पाया जाने वाला लघु वृक्ष या झाड़ी है।और जैसा कि आप जानते है की इसके नाम ’सी-बकथोर्न’ नाम से विदित होता है और कि यह समुद्रतल से लेकर अधिक ऊँचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों तक पाया जाता है। हिप्पोफी के लघु वृक्ष 3 से 10 मीटर तक ऊँचे झाड़ियाँ के नाम से पहचाने जाते है

जानिए इस फल की किस्मे और प्रजाति :-

हमारे भारत में इसकी तीन प्रजाति पायी जाती है और इसके अन्तर्गत विश्व में पायी जाने वाली कुल 7 प्रजातियों है और इसमें से भारत में तीन प्रजाति पा यी जाती है और हिप्पोफी रेहमनॉइडिस, हिप्पोफी सेलिसिफोलिआ, और हिम्पोफी तिबिताना 4500 मीटर तक की ऊँचाई पर बिखरी हुई है परन्तु ट्रान्स हिमालय के लद्दाख हिमाचल प्रदेश कुमॉऊ एवं उत्तराखण्ड सिक्किम एवं अरूणाचल प्रदेश में विस्तृत रूप से पायी जाती है।

पोषक तत्वों से भरपूर :-

जिसमें ओमेगा 7 फैटी एसिड पाया जाता है। जिस तरह यह फल हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। उसी तरह की इसकी पत्तियां किसी चीज में कम नहीं है। सी-बक्थोर्न में भरपूर मात्रा में ओमेगा फैटी एसिड 3, 6,7 और 9 होते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट्स पाया जाता है। इसके अलावा इसमें विटामिन सी, ई, अमीनो एसिड, लिपिड, बीटा कैरोटीन, लाइकोपीन के अलावा प्रोविटामिन, खनिज और बॉयोलॉजिकल एक्टिव तत्व पाएं जाते है। यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए एक बेहतरीन फल

जाने इसकी करने से मुनाफ़ा के बारे :-

यह दुनिया का ऐसा एकलौता फल है जिस्सकी खेती करने से किसान को अच्छा तगड़ा मुनाफा हो सकता है यह बहुत सारी बीमारियों में भी काम आता और इससे स्किन से जुडी समस्याओ और अमेज या अमील का उपयोग गठिया, पेट और आंतों के अल्सर, भाटा के कारण क्षति (गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स रोग या जीईआरडी नामक स्थिति), गाउट, अस्थमा, हृदय और रक्त वाहिका की समस्याओं, उच्च रक्तचाप, रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर के उपचार, मधुमेह, और त्वचा पर चकत्ते के लिए किया जाता है।

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