सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पतंजलि आयुर्वेद को भ्रामक दावों वाली दवाओं का विज्ञापन करने से प्रतिबंधित कर दिया गया। अदालत ने भ्रामक दावे जारी रखने के लिए संस्थापक बाबा रामदेव और एमडी आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​​​का नोटिस भी जारी किया है। कोर्ट ने बीमारियों के इलाज पर भ्रामक विज्ञापनों पर जवाब मांगा है। विज्ञापनों में भ्रामक दावों के लिए अदालत ने संगठन को कड़ी फटकार लगाई है।

पतंजलि के विज्ञापन पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को अपने औषधीय उत्पादों का विज्ञापन करने से रोक दिया और आदेश का उल्लंघन करने के लिए बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्णन को अदालत की अवमानना ​​​​का नोटिस जारी किया। शीर्ष अदालत ने कंपनी को यह भी निर्देश दिया कि वह कोई भ्रामक विज्ञापन जारी न करे या एलोपैथी के प्रतिकूल बयान न दे। यह याचिका इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) द्वारा दायर की गई थी, जिसमें सभी बीमारियों का इलाज करने का दावा करने वाले और एलोपैथिक दवाओं की प्रभावकारिता पर संदेह करके डॉक्टरों को बदनाम करने वाले सभी भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ आदेश देने की मांग की गई थी।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार

शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह के भ्रामक विज्ञापनों के माध्यम से पूरे देश को धोखा दिया जा रहा है। पतंजलि आयुर्वेद और आचार्य बालकृष्णन को अवमानना ​​नोटिस का जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। पतंजलि के विज्ञापनों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को घेरा है। कोर्ट ने कहा कि पूरे देश को ऐसे विज्ञापनों के जरिए घुमाया जा रहा है और केंद्र सरकार अपनी आंखें बंद करके बैठी है। ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने कहा क‍ि सरकार को तत्काल कुछ कार्रवाई करनी होगी।

Sumit

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