बसंत पंचमी से हल्दी कुमकुम क्यों किया जाता है ,जाने इसके महत्व के बारे में

यह भी हमारे भारत के सांस्कृतिक त्योहारों को कई अलग अलग तरह से मनाया जाता है और और यह रस्म ज्यादातर महारत में मनाया जाता है और महिलाये इस रस्म को इसलिए करती है की उनकी पति की दीर्घायु हो और इसमें सारी महिलाये मंदिरो में या फिर अपने घरो में आयोजित करती है और इस दिन महिलाये एक दूसरे को हल्दी और कुमकुम से एक दूसरे को तिलक करती है और साथ में एक दूसरे को सुहांग की सामान को देती है और रंगबिरंगी चुडिया भी देती है आज हम आपको इसके बारे में बताते है और यह मकर सक्रांति से शुरू होकर बसंत पचमी के बाद तक पुरे महीने तक चलता है और ऐसा करने से घर में सुख शांति और ऐश्वर्य बना रहता है

सिंदूर का आदान प्रदान :-

इस दिन महिलाये एक दूसरे से सिंदूर का आदान प्रदान करती है और देवीयो को प्रस्सन करने के लिए भजन का भी कार्यक्रम भी करती है और ऐसा करने से सुहांग महिला अपने पति की लम्बी उम्र की कमना करती है और ये सब करने के बाद प्रसाद वितरण भी किया जाता है

हल्दी कुमकुम की थाली को सजाये :-

हल्दी कुमकुम की सेरेमनी के लिए थाली को सजाये आपको बताते है इसमें सबसे पहले आप एक थाली को ले और उसमे हल्दी को रखे और कुमकुम को ले और इसमें आप गुलाब जल को रखते है और उसमे सुहागन को देने के लिए चूड़ी और बिंदी को रख लेते है और इस त्यौहार को बड़े हर्ष उल्लास के साथ मानते है और साथ में तिल और गुड़ से बने हुए लड्डू को भी रखे और रेवड़ी को रखना चाहिए और साथ में आपको इस दिन दान भी करना चाहिए

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Upasana

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