अगर आप एसी का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो बेहतर होगा कि आप नॉन-इन्वर्टर एसी खरीदें।

मार्केट में घरों के लिए मुख्य रूप से दो तरह के एयर कंडीशनर बेचे जाते हैं. एक इन्वर्टर एसी और दूसरा नॉन इन्वर्टर एसी। जब कई लोग पहली बार नाम सुनते हैं तो वे सोचते हैं कि इन्वर्टर एसी को इन्वर्टर से चलाया जा सकता है लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। आइए जानें क्या है इसकी सच्चाई...


कई लोगों को पहली बार नाम सुनकर यह लगता है कि इन्वर्टर एसी को इन्वर्टर से चलाया जा सकता है. परंतु सच्चाई इससे बहुत दूर है. आप एक बड़ी गलतफहमी में हैं. यहां हम आपकी हर कन्फ्यूजन दूर करेंगे. आइए जानते हैं. (Photo: Canva)

असल में एसी में लिखे इन्वर्टर का मतलब उसमें इस्तेमाल होने वाली टेक्नोलॉजी से है. इन्वर्टर एसी में करंट, कंप्रेसर और रोटर को कंट्रोल करने के लिए कंट्रोलर लगाया जाता है.


इन्वर्टर एसी में तापमान में बदलाव के साथ कूलिंग में बदलाव होता है, जबकि नॉन-इन्वर्टर एसी में एसी की कूलिंग एक निश्चित तापमान पर होती है।

कहने का मतलब है कि जब कमरा ठंडा हो जाता है, तो इन्वर्टर एसी का कंप्रेसर धीमा हो जाता है. इससे बिजली की खपत कम होती है

बिजली की खपत कम होने से बिजली का बिल भी कम आता है. जबकि नॉन इन्वर्टर एसी 10-15% ज्यादा बिजली कंज्यूम करता है जिससे बिल भी अधिक आता है.

इन्वर्टर एसी का विकल्प केवल स्पिलिट एसी में ही उपलब्ध होता है. विडों एसी में इन्वर्टर एसी का विकल्प नहीं मिलता.


इन्वर्टर एसी की तुलना में नॉन-इन्वर्टर एसी कम खर्चीला होता है लेकिन अगर आप एसी का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो बेहतर होगा कि आप नॉन-इन्वर्टर एसी खरीदें।

Updated On 1 May 2023 6:51 AM GMT
Bhanu Singh

Bhanu Singh

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